विष्णुलोक में ही वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को माँ गंगा का जन्म हुआ था। इन्हें मोक्ष-प्रदायनी भी कहा जाता है। अक्षय तृतीया को भगवान् विष्णु पृथ्वी पर अवतरित हुए और सप्तमी तिथि को माँ लक्ष्मी ने उनके चरण धोये। ब्रह्माजी ने यह चरणोदक अपने कमण्डल में भर लिया और उसे ब्रह्मलोक में बहने के लिए छोड़ दिया।
ब्रह्माजी ने भगवान् विष्णु के इस चरणोदक को ‘गंगा’ नाम दिया और गंगा ब्रह्मलोक से स्वर्गलोक के बीच बहने लगी। उसी गंगा माँ का आज वैशाख शुक्ल सप्तमी को जन्मोत्सव है। उसी गंगा माँ का आज वैशाख शुक्ल सप्तमी को जन्मोत्सव है। पूरे देश में माँ गंगा का जन्मोत्सव श्रद्धापूर्वक और पूरे उल्लास से मनाया जाता है। हरिद्वार में इस पावन पर्व पर प्रतिवर्ष विशेष और भव्य आयोजन किये जाते हैं। बाद में अयोध्या के राजा भगीरथ जी इसी गंगा माँ को पृथ्वीवासियों के कल्याण के लिए धरती पर लाये। कुछ समय माँ गंगा भगवान् शिव की जटाओं में भी रही। गंगा जी को पृथ्वीपर लाना आसान नहीं था। इक्ष्वाकु वंश की चार पीढ़ियाँ लगीं। अंतत: राजा भगीरथ जी को सफलता मिली। कपिल मुनि जी के आश्रम में राजा सगर के पुत्रों की राख थी। माँ गंगा की धारा में बहकर उन्हें मुक्ति मिली। इस तरह से भगीरथ जी का यह महायज्ञ पूर्ण हुआ। गंगा सप्तमी को करोड़ों श्रद्धालु गंगा जी में डुबकी लगाते हैं।
Published by- Harshi Jain